हमारा समाज यह है जो अमीर के ठेले पर खड़ा होना जानता है पर किसी गरीब के पेट के लिए एक रूपये का त्याग नहीं दे सकता .
मत करना नजर-अंदाज गरीब की तक़लीफो को ऐ - मेरे दोस्त जब ये विछड़ जाते है तो रेशम के तकिये पर भी नींद नहीं आती
कृपया खुद बदले और समाज को अच्छा बनाये
जय श्री राम जी
No comments:
Post a Comment